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मौन और महाभारत🥀

इन दिनों लौकडाउन के चलते कुछ पौराणिक व धारावाहिक कार्यक्रम प्रतिदिन प्रसारित किए जा रहे हैं। अभी हाल ही में महाभारत के कुछ एपिसोड देखे, उन्हें देखकर मानो ऐसा लगा जैसे द्रौपदी की वेदना उनकी अपनी नहीं पर मेरी खुद की भी थी।

हम चाहे जितने भी महाबली क्यों ना बन जाएं,हम सब के अंदर एक द्रौपदी है। वह द्रौपदी जो न्यायप्रिय तो है पर खुद बार-बार अन्याय का शिकार बन जाती है। पर एक भिन्नता यह है कि द्रौपदी के न्याय के लिए लड़ जाने वाले ५ पांडव उनके साथ थे। यहां पांडवों का किरदार भी हमें ही निभाना है। एक बात यह भी है कि वहां कौरव सिर्फ १०० थे, हमारे सामने तो अपना, हर वह व्यक्ति है, जिसे हमने जीवन के किसी मोड़ पर या तो कोई तकलीफ दी थी या उन्हें उनकी गलती का एहसास करवाया था। कुछ बाहरी लोग भी होते हैं हमारे जीवन में, जैसे कि मंदिर का वह पुजारी जो हाथ तो सिर पर रखता है पर उसकी नियत दुपट्टे पर होती है, वह ऑटो चालक जो बेवजह दर्पण हमारी और मोड़ लिया करता है या फिर हजारों की भीड़ में वो एक, जो अपने एक स्पर्श से हमें दहशत में छोड़ जाता है।

द्रौपदी के लिए उनके पिता ने ऐसे जीवन की कामना की थी जिसमें द्रौपदी को सिर्फ अन्याय मिले उन्हें बार-बार लज्जित किया जाए और उन पर लांछन लगाया जाए पर हम? हमारे लिए तो ऐसे जीवन की कामना किसी ने नहीं की। हमें हमेशा से आशीष मिला है कि हम फूले फले और खुश रहें, फिर भी हम अपने आप की तुलना द्रौपदी से कर रहे हैं। इसकी वजह है हमारा मौन।हम चुप रहते आए हैं। अपने साथ होने वाले हर दुष्कर्म को सहते आए हैं, क्यों ? क्योंकि शायद हम डरते हैं। हमने जकड़ रखा है अपनी उन इंद्रियों का जो हमें पांडवों की शक्ति प्रदान करती है। इसलिए तो हम आवाज़ नहीं उठा पाते। हम यह सोचते हैं कि कोई एक हो तो आवाज बुलंद कर उसे चीख कर दबोच लें, लेकिन हर रोज़ किस किस पर चीखें और किस किसको धर दबोचें? बस यहीं पर अंत होता है हमारी रोज़मर्रा के डरावने सच का।

आखिर इस परिस्थिति से कैसे निपटा जाए?

इस सवाल के दो जवाब हैं। पहला यह कि आप इसे हर रोज़ एक सपना मानकर भुला दिया करें और दूसरा यह कि अपनी शक्ति को समेटना शुरू करिए, सशक्त बनिए। कहा जाता है द्रौपदी यज्ञसेनी थीं, इसलिए आपको याद रखना होगा कि आपके अंदर एक ज्वलंत ऊर्जा है, जो भले ही अब तक एक छोटी सी चिंगारी थी, पर अब वह एक विशालकाय लौ का रूप ले चुकी है, इस लौ का शमन केवल तभी होगा जब आप चाहेंगे। हर रोज़, अपने आवेश को एकत्र कर एक ऐसे हथियार का निर्माण करें, जिसके बल पर आप अपने मान के लिए अंत तक लड़ सकेंगे। शुरुआत में शायद आप डगमगाने लगेंगे पर जब आपके पैर जम जाएंगे, तब एक क्रांति का जन्म होगा। उस क्रांति के चलते , भस्म होगी मानव की अमानवीयता, और शायद इसी तरह आप जीत सकेंगे अपने जीवन का यह महाभारत।



 
 
 

2 Comments


Aarna 🌼
Aarna 🌼
May 23, 2020

Thank you very much!🌸

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Anvesh Mishra
Anvesh Mishra
May 23, 2020

Something very true and speaks about women empowerment!

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